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सोमवार, 19 जुलाई 2010

पेड न्यूज और पैसे की हेराफेरी के बारे में दर्जनों जगह भेजी शिकायत

: दैनिक जागरण से चीफ रिपोर्टर पद से इस्तीफा देने वाले राकेश शर्मा ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. उन्होंने दैनिक जागरण पर लगे पेड न्यूज के आरोपों को पुख्ता कर दिया है. सेबी को लिखे अपने पत्र में राकेश ने विस्तार से सारी बातें कहीं हैं जिसे नीचे प्रकाशित किया गया है.
राकेश शर्मा ने जागरण के साथ 10 अप्रैल 2002 से पारी शुरू की. तब उन्हें करनाल में ज्वाइन कराया गया था. 1 मार्च 2005 को उन्हें कुरुक्षेत्र भेज दिया गया. 5 मई 2008 को फरीदाबाद ट्रांसफर हो गया. 26 दिसंबर 2009 को उन्हें ट्रांसफर कर पंजाब के रोपड़ भेज दिया गया. राकेश ने 2 फरवरी 2010 को अपना इस्तीफा सौंप दिया. राकेश शर्मा ने अपने कार्यकाल में दो लोकसभा चुनाव और दो विधानसभा चुनाव कवर किए हैं.
बीते लोकसभा -विधानसभा चुनाव में राकेश फरीदाबाद में हुआ करते थे. उससे पहले जो लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव हुए थे, राकेश करनाल में दैनिक जागरण के लिए कार्यरत थे. राकेश ने दैनिक जागरण की जो शिकायत सेबी, चुनाव आयोग, राष्ट्रपति, प्रेस काउंसिल आदि को भेजी है, उसमें काफी कुछ कहा गया है. साथ में उन्होंने पेड न्यूज के रूप में लिए गए पैसे की डिटेल भी भेजी है. सारे दस्तावेज यहां प्रकाशित किए जा रहे हैं. -एडिटर

सौजन्यः-भडा़स4मीडिया डाट काम  

बुधवार, 7 जुलाई 2010

सिर चढ़कर बोल रहा है जिम जाने का जनून

स्लिम होने का जुनून मायानगरी की हसीनाओं के सिर पर ही संवार नहीं, बल्कि बठिंडा नगरी के पत्रकारों में भी युवा व स्लिम होना का क्रेज बढ़ता जा रहा है। पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखते ही आपको मुफ्त के खाने के ऑफर आम मिलने शुरू हो जाते हैं, मुफ्त का खाना पीना जब तोंद बाहर की तरफ बढ़ने लगती है तो आइने के सामने खड़े होने से शर्म महसूस होने लगती है, पत्नियां और प्रेमिका बड़ी तोंद पर एतराज जिताते लगती हैं। ऐसे में याद आती है जिम जाने की। जो पत्रकार आज जिम जा रहे हैं, वो युवावस्था में कभी जिम पर गए लेकिन किन्ही कारणों से अब नहीं जा रहे थे लेकिन अब वह फिर से जिम जाकर स्वयं को तंदरुस्त बनाने में लगे हैं। इसका सकरात्मक पहलु यह है कि अब इनमें कई पत्रकारों को अब आप पहचान भी नहीं सकते हैं। फिलहाल इन पत्रकारों को देखकर दूसरे भी प्रेरणा लेने लगे हैं इसके चलते कई अधेड़ उम्र के व्यापारी भी अब जिम जा रहे हैं। यही नहीं उक्त लोग अब दूसरों को जिम जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस जनजागरण अभियान को जहां लोगों को फायदा हो रहा है वही जिम चलाने वाले भी बिना प्रचार के धंधा जमा रहे हैं।
आज आलम ऐसा है कि बठिंडा के समाचार पत्रों में कार्यरत ज्यादातर संवाददाता अब जिम में पसीना बहाने में व्यस्त हैं। इसके पीछे कुछ और भी कारण हो सकता है, खुद को आकर्षक बना दूसरे पर प्रभाव जमाना। मुझे एक किस्सा याद आ रहा है, जो आज से कुछ साल पहले घटित हुआ था। हुआ यूं कि एक काफी हेल्थी पत्रकार को एक महिला का फोन आया कि मैं आपकी खबरें पढ़ती हूं और आपसे मिलना चाहती हूं। उसने पत्रकार को स्थानीय मिनी सचिवालय में बुलाया। वो पत्रकार भी घर से बड़ा सज धज कर उससे मिलने निकला, लेकिन वहां कोई महिला थी ही नहीं। किसी ने उसको मूर्ख बनाया था। उस पत्रकार की तरह आज इन पत्रकारों में खुद को आकर्षक बनाने की होड़ है, ताकि कोई युवती उनको देखकर उन पर लट्टू हो जाए। फिलहाल इसके पिछे मकसद कुछ भी हो लेकिन इसका फायदा यह जरूर हो रहा है कि एक स्वास्थ्य पत्रकार समाज का निमार्ण जरूर हो रहा है।