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मंगलवार, 31 अगस्त 2010

प्रभात खबर को रिपोर्टरों व सब एडिटरों की जरूरत


बिहार-झारखंड के प्रमुख हिंदी दैनिक प्रभात खबर को युवा पत्रकारों की जरूरत है. फील्ड के लिए रिपोर्टरों की जरूरत है तो डेस्क के लिए सब एडिटरों की. सात दिन के भीतर आवेदन मांगा गया है. पूरी जानकारी इस विज्ञापन के जरिए आपको मिल सकती है. अगर आप इस पैमाने पर खुद को फिट पाते हैं तो तुरंत आवेदन करें और देश के इस प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान के हिस्से बनें.

चैनलों को प्रसारण की अनुमति देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता !

सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि उन्होंने यह ऐलान नहीं किया है कि अब से नए चैनलों को प्रसारण की अनुमति नहीं मिलेगी। बल्कि उनका मंत्रालय सिर्फ यह कोशिश कर रहा है कि चैनलों को प्रसारण की अनुमति देने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाए।
मंत्रालय ने अपने सचिव द्वारा अक्तूबर 2009 में ट्राई को लिखे पत्र (कि वह नए मानदंड तय करने के लिए मंत्रलय को सुझाव दे) की अवधि के बाद के आवेदनों पर गौर करने से मना कर दिया है। जिनका इस अवधि से पहले आवेदन आया है, उन पर जरूरी प्रक्रिया जारी है।
सोनी ने बताया कि ट्राई संभवत: मार्च तक अपने सुझाव मंत्रालय को दे देगा। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सभी केन्द्रीय मंत्रालयों से कहा है कि वे खुद ही अपने विज्ञापन जारी करने के बजाए उसे डीएवीपी के जरिए ही मीडिया में जारी करें। अंबिका सोनी ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि मंत्रालयों से कहा है कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो यदाकदा गलतियां होती रहेंगी और इसके लिए उनके मंत्रालय का विभाग डीएवीपी (श्रव्य एवं दृश्य प्रचार विभाग) जिम्मेदार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव ने भी इस आशय के निर्देश सभी मंत्रालयों के दिए हैं और यह भी कहा है कि संबंधित मंत्रलय विज्ञापनों के साथ यह निर्देश न भेजें कि किन किन अखबारों या चैनलों पर वे विज्ञापन प्रकाशित/प्रसारित हों।
सोनी ने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि प्रसारण विधेयक का एक लगभग सर्वस्वीकृत मसौदा संसद के आगामी सत्र के दौरान अप्रैल के आखिर से लेकर मई तक संसद में चर्चा के लिए पेश कर दिया जाए। सोनी ने पत्रकारों के लिए 70-80 लाख रुपये सालाना क्षमता वाले एक कोष के गठन की बात की और कहा कि इससे संबंधित दिशानिर्देश बनते ही इसकी घोषणा की जाए। यह आकस्मिक विपत्ति या आकस्मिक निधन के शिकार पत्रकारों के परिवार वालों की सहायता के लिए होगा।

रविवार, 29 अगस्त 2010

आ रहा है नया न्यूज चैनल- 'न्यूज17'

Saturday, 28 August 2010 17:04 B4M भड़ास4मीडिया

E-mailPrintPDF
दिसंबर महीने के लास्ट तक एक नया न्यूज चैनल अवतरित हो जाएगा. 'न्यूज17' नाम से. इसके सीईओ और एडिटर इन चीफ राजेश शर्मा हैं. एडिटोरियल और कंटेंट हेड देखेंगे विवेक अवस्थी. विवेक आईबीएन7, आजतक, जी न्यूज, स्टार न्यूज, दिल्ली आजतक समेत कई मीडिया हाउसों में काम कर चुके हैं. इस चैनल के लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा चुका है और मंजूरी की प्रक्रिया में है. लाइसेंस मिलने के तुरंत बाद भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इस चैनल का टारगेट व्यूवर युवाओं को रखा गया है. यह नेशनल न्यूज चैनल होगा.
चैनल प्रबंधन का दावा है कि डराने धमकाने और सनसनी मचाने वाली खबरें इस चैनल पर नहीं होंगी. चैनल का कामकाज बिलकुल ट्रांसपैरेंट रहेगा. चैनल प्रबंधन ने चैनल लांचिंग के संबंध में एक विज्ञप्ति जारी की है, जिसे यहां प्रकाशित किया जा रहा है. इस विज्ञप्ति में चैनल के संबंध में अन्य कई जरूरी जानकारियां हैं.

'NEWS 17' News Channel to be launched soon

राजेश शर्मा
राजेश शर्मा
A new news channel, NEWS 17 is all set to be launched sometime later this year. Rajesh Sharma, Vice President with Total TV, who left organization recently has planned  to launch NEWS 17 National News Channel with Sangeet  audio company promoted by Mr. Amit Vaid and Mr Balkishan Rathi. News 17 will be joint venture of Network 17 Media (P) Ltd promoted by Rajesh Sharma and Sangeet Audio Ltd.
The licence of News 17  is already in proicess with the Ministry of Information and Broadcasting and is expected to be with the proprietors soon. Infrastructure and recruitment process for News 17 will also be starting very soon. Rajesh Sharma said it NEWS 17 will be the news channel with difference where viewers will get complete package of news and infotainment in a totally new avtaar.
Amit Vaid said that keeping in mind that youngsters at present stay away from hard news channels, the aim of NEWS 17 be to break this trend. He said that the aim of the channel is to target youth and so it will be channel for ‘youngistan’.
The channel has roped in Vivek Avasthi as its Editorial and Content Head. Vivek Avasthi has been in print and electronic media for over 19 years. He has earlier worked with Aaj Tak, Zee News, Star News, Dilli Aaj Tak and IBN7 apart from other media organisations.

शनिवार, 21 अगस्त 2010

भास्कर समूह को 6 ऐसे मीडिया प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो स्टेट एडिटोरियल कोआर्डिनटेर के बतौर काम कर सकें.

भास्कर समूह को 6 ऐसे मीडिया प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो स्टेट एडिटोरियल कोआर्डिनटेर के बतौर काम कर सकें. ये सभी छह लोग भोपाल में पदस्थ होंगे. ये नेशनल एडिटोरियल कोआर्डिनेटर को रिपोर्ट करेंगे. भास्कर समूह ने इन पदों पर भर्ती के लिए एक जॉब कंसल्टेंसी कंपनी की सेवाएं ली हैं. कंसल्टेंसी कंपनी ने इस जाब प्रोफाइल से मैच करने वाले कई मीडिया प्रोफेशनल्स को मेल भेजकर सीवी भेजने को कहा है. इस मेल में जो कुछ कहा गया है, उसे आप नीचे पढ़ सकते हैं...
Dear Candidate
Our client: A leading hindi newspaper has the following immediate requirement :
Position: State Editorial coordinator
location : bhopal
reporting to the national editorial coordinator
no of positions 6
role
Key Job Responsibilities:
1. Should have a good understanding of the editorial function at the state level
2. Periodic evaluation of product on various parameters including benchmarking.
3. Identifying gaps in the given product.
4. Coordinating plans for product improvement
5. Preparing detailed project plans
6. Coordinating execution and monitoring progress against the plans.
7. Escalating problem areas to the appropriate levels for resolution.
8. Ensure adherence to timelines and costs wherever applicable.
9. Preparation and analysis of all MIS relating to product and on-going projects.
10. Coordinating resources wherever necessary.
11. Will be responsible for running the complete management function for the State editor at the respective location
12. He will prepare agendas for the meetings and take the follow ups to closure with the relevant stake holders

If interested pls mail a copy of your cv in word format with the following information
-current and expected package
-joining period if selected

regards
xxxxxxxxx
xxxxxxxxxx
mumbai

शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता का फर्जीवाड़ा

 कई पत्रकारों के फर्जी हस्ताक्षर कर हड़पी स्पीकर द्वारा दी गई सरकारी ग्रांट : शिकायत के बाद जिला रजिस्ट्रार ने रद्द की प्रेस करेस्पोंडेंट एसोसिएशन : हरियाणा के जिला झज्जर के बहादुरगढ़ खंड का मामला है. यहां  दैनिक जागरण समाचार पत्र में विशेष संवाददाता (जागरण द्वारा जारी पत्र अप्वाइंटमेंट लेटर नीचे संलग्न है) पद पर कार्यरत इशांत राठी कार्यरत हैं.

उन्होंने शहर के आधा दर्जन से ज्यादा पत्रकारों के फर्जी हस्ताक्षर कर एक एसोसिएशन को पंजीकृत कराया. फिर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष से 15 हजार रुपए की सरकारी ग्रांट ले ली. इस फर्जीवाड़े का पता जब अन्य पत्रकारों को लगा तो उनके होश उड़ गए. सभी पत्रकारों ने फर्जीवाड़े की शिकायत जिला रजिस्ट्रार से की. रजिस्ट्रार ने जांच के बाद संस्था को रद्द करते हुए पुलिस अधीक्षक से कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है. दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता इशांत सिंह पुत्र तेजपाल राठी ने 18 अगस्त 2009 को बहादुरगढ़ के पत्रकारों प्रवीण धनखड़ (हरियाणा न्यूज), योगेंद्र सैनी (टोटल टीवी), शील भारद्वाज (अमर उजाला), सुशील वत्स (हरि भूमि), प्रमिला सैनी (साधना टीवी), पंकज रोहिल्ला व आरडी मिश्रा (दैनिक जागरण) के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रेस करेस्पोडेंट एसोसिएशन नामक संस्था का पंजीकरण करवाया. इसके बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष रघुबीर सिंह कादियान से संस्था को 15 हजार रुपए देने की घोषणा करवा दी. खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय बहादुरगढ़ से संस्था के लिए चेक (नंबर 58030) द्वारा राशि प्राप्त किया.
इशांत ने बीडीपीओ को उपरोक्त चेक प्राप्त करने के लिए किए गए आवेदन पत्र पर चेक प्राप्ति की पावती भी दे रखी है. इस पावती पर भी इशांत के अलावा कमल सिंह, योगेंद्र सैनी, सुशील वत्स व पंकज के फर्जी सह-हस्ताक्षर किए गए हैं. इन सात में से पांच पत्रकारों ने, जो बहादुरगढ़ पत्रकार संघ (रजि संख्या : 06-15बी/710/16.7.08) के सदस्य हैं,  जिला फर्म एवं सोसाइटी रजिस्ट्रार को शपथपत्र दिया. इसमें कहा कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं. इन पत्रकारों ने स्वयं हाजिर होकर भी बयान दिया कि इस फर्जी संस्था के पंजीकरण में उनके फर्जी दस्तखत किए गए हैं. कई अन्य साक्ष्यों समेत बहादुरगढ़ पत्रकार संघ के महासचिव रवींद्र सिंह राठी व जिला सूचना अधिकार मंच के समन्वयक नरेश जून ने भी हरियाणा के मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, राज्य चौकसी ब्यूरो के उपमहानिदेशक, जिला उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक व उपमंडल अधिकारी (ना.) से समूचे घोटाले की शिकायत की.
हैरत की बात यह है कि 18 अगस्त 2009 को पंजीकृत होने वाली इस संस्था को हरियाणा विधानसभा के स्पीकर द्वारा 12 अगस्त 2009 को ही ग्रांट मंजूर कर दी गई थी. इस फर्जीवाड़े के सूत्रधार इशांत सिंह के पिता तेजपाल राठी हरियाणा विधानसभा में जनसंपर्क अधिकारी के पद पर तैनात थे, उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सरकारी धन को हड़पने में अपने पुत्र इशांत सिंह की भरपूर मदद की. इस मामले में कार्रवाई करते हुए जिला फर्म एवं सोसाइटीज रजिस्ट्रार ने पाया कि प्रेस करेस्पोंडेंट एसोसिएशन के आवेदन में किए गए हस्ताक्षरों में और इन पत्रकारों के असली हस्ताक्षरों में दिन-रात की भिन्नता है जो इनकी शिकायत को सही सत्यापित कर रही है. इससे यह प्रतीत होता है कि इशांत सिंह पुत्र तेजपाल राठी ने उपरोक्त संस्था फर्जी ढंग से रजिस्टर करा कर हरियाणा सरकार को गुमराह करने व चूना लगाने का काम किया है. रजिस्ट्रार ने इस फर्जी संस्था को रद्द कर जिला पुलिस अधीक्षक को इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश कर दी. संबंधित दस्तावेज व आदेश नीचे दिए जा रहे हैं.
-रवींद्र सिंह राठी की रिपोर्ट

सोमवार, 19 जुलाई 2010

रेटिंग के चक्कर में न्यूज चैनल मन-मस्तिष्क कर रहे हैं दूषित :

 टक पटक कर मार डाला... भाई-बहन का रिश्ता हुआ शर्मसार... ममता हुई कलंकित... इस तरह की सुर्खियां आजकल हर न्यूज चैनल की पहली हेडलाइन होती है। टीवी खोलते ही इस तरह की खबरें देखकर कई बार बुरी तरह से इरीटेशन होता है. मुझे लगता है कि ऐसा केवल मेरे साथ नहीं बल्कि कइयों के साथ होता है. पत्रकारिता से जुड़े होने के कारण इसकी वैल्यू को समझता हूं. कई बार ऐसे मौके आए जब इस तरह की खबरों को सनसनीखेज बनाने के लिए मीटिंग में माथापच्ची करनी पड़ती थी. दरअसल यह बात इसलिए भी कर रहा हूं कि मुझे अपने एक संपादक की बात याद आ गई।। 
आत्महत्या की एक खबर पर वो सिर्फ इसलिए जोरदार भड़क गए थे कि मेरे सहयोगी रिपोर्टर ने हेडलाइन से लेकर खबर में भी दो-तीन जगह 'सल्फास खाकर युवक ने खुदकुशी की', लिख दी थी. पहले तो इतनी छोटी सी भूल के लिए इतने जोरदार गुस्से के लिए हम लोगों ने उन्हें काफी कोसा था. उनका कहना था कि जहर खाकर आत्महत्या लिखना काफी है, क्यों हम लोगों को आत्महत्या वाली दवाइयों का नाम प्रचारित कर रहे हैं. अब उनकी बात को याद करके लगता है कि हम खबरों को सनसनीखेज बनाने के चक्कर में क्या क्या गलती करते हैं.। मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति या समुदाय का कोई भी कदम विचारधारा की परिणिति होती है. विचारधारा समाज और इसमें होने वाली घटनाओं को महत्व देने से बनती है. हम अक्सर देखते हैं कि किसी हादसे या घटना के पक्ष-विपक्ष में होने वाली प्रतिक्रया को जनभावना के रूप में प्रचारित किया जाता है. लेकिन वास्तव में ये जनभावनाएं नहीं होती. इसमें कुछ ऐसी विचारधारा होती है, जो कहीं कहीं से बायस्ड होती है. जिसका परिणाम हर उस व्यक्ति को भुगतना पड़ता है, जो इससे प्रभावित हुआ है. बार-बार इस तरह की घटनाओं के सुनने या देखने से यह भी लगता है कि लोगों ने इस ढ़ंग से अपनी तकलीफ या समस्या को कम करने की कोशिश की थी, भले ही वे सफल हुए या नहीं,  इससे उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता. आपने देखा होगा कि मीडिया में किसी घटना के जरूरत से ज्यादा प्रचारित होने पर आसपास या कहीं और उसकी पुनरावृत्ति होती है। कुल मिलाकर मेरा कहना है कि टीआरपी के चक्कर में हम लोगों के मन मस्तिष्‍क को किस तरह दूषित कर रहे हैं,  इसका भी ध्यान रखना चाहिए. केवल साप्ताहिक रेटिंग के लिए हम अपने दायित्वों और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों न भूलें तो हम एक अच्छा वातावरण बना सकते हैं. नेशनल चैनल में तो फिर भी स्थिति थोड़ी ठीक है, लेकिन रीजनल चैनलों ने पूरी सीमाएं ही लांघ दी हैं. वहां बैठे वरिष्ठ संपादक और अनुभवी लो यह भी भूल जाते हैं कि उनके चैनल को घर परिवार में छोटे से लेकर बड़े बुजुर्ग भी देखते हैं. टिकर और ब्रेकिंग खबरें तो ऐसी चलती हैं, जैसे अपराध नहीं हुए तो चैनल बंद हो जाएगा। मेरा यह भी नहीं कहना है कि चैनल को गुडी-गुडी होना चाहिए, लेकिन लोगों के पास ढेरों समस्याएं है, उनका निराकरण कर गैरजिम्‍म्‍ेदार लोगों को बेनकाब किया जा सकता है. समाज में ज्यादा से ज्यादा अच्छाई लाने और बुराइयों को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए. न कि गलत कामों को इस तरह पेश किया जाए कि लोग उसकी तरफ आकर्षित हों. हम ऐसे लोगों को सामने लाने से सिर्फ इसलिए परहेज करते हैं, क्योंकि वे लोग प्रभावशाली होते हैं. मेरा कहना है कि प्रभावशाली और दबंग लोगों की असलियत सामने लाकर भी टीआरपी बढ़ायी जा सकती है.
लेखक समरेंद्र रायपुर के निवासी हैं

रविवार, 18 जुलाई 2010

वरिष्ठ पत्रकार कमल शर्मा का शनिवार को निधन


नौ महीने से बीमार चल रहे 43 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार कमल शर्मा का शनिवार को निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार रविवार सुबह 11 बजे गीता कालोनी स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा. मोटरसाइकिल से दुर्घटनाग्रस्त होने से उनके पैर में मल्टीपल फ्रैक्चर हुआ था. इससे उबरते ही दो माह बाद उन्हें ब्रेन ट्यूमर हो गया. इसका इलाज चल रहा था. शनिवार दोपहर तबियत खराब होने पर उन्हें लाइफ लाइन, फिर मैक्स बालाजी और अंत में लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
वह आज तक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पत्रकार थे. इसके पहले वह नवभारत टाइम्स में कार्यरत थे. वह चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे. कमल की मौत पर दिल्ली का पूरा मीडिया जगत मर्माहत है. उनके साथ काम कर चुके दर्जनों क्राइम रिपोर्टर आज रुआंसे हैं. सब उनके सरल सहज व्यवहार की चर्चा कर रहे हैं. किसी को कतई अंदेशा न था कि कमल शर्मा जी इस तरह अचानक सभी को छोड़ कर चले जाएंगे. कमल के साथ काम करने वाले कई लोग उनसे काम के गुर सीखकर बड़े पदों पर चले गए, लेकिन कमल का कभी किसी के प्रति प्यार कम न हुआ. वे जैसे थे, वैसे ही रहे. कहते हैं कि अच्छे लोग जल्द इस दुनिया से चले जाते हैं. कमल शायद ऐसे ही अच्छे लोगों में से थे जिन्हें ईश्वर ने दुनिया के साथ रहने-जीने नहीं दिया. कमल जी के अंतिम संस्कार में कल दिन में 11 बजे गीता कालोनी स्थित श्मशान घाट पर उनके चाहने और जानने वाले इकट्ठा होंगे. समय हो तो आप भी आइए.

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

भास्कर, जम्मू की टीम फाइनल

-लांचिंग 24 जुलाई को संभावित
-पंजाब केसरी के दो पत्रकारों ने ज्वाइन किया 
-अमर उजाला के गौरव भी भास्कर पहुंचे : दो फोटोग्राफरों ने भास्कर का दामन थामा : चंडीगढ़ से सूचना है कि पंजाब केसरी से दो लोगों ने इस्तीफा देकर दैनिक भास्कर की नई लांच होने वाली जम्मू यूनिट के साथ नई पारी शुरू की है. इनके नाम हैं पवित्तर गुप्ता और अजय मीनिया. सूत्रों के मुताबिक पवित्तर गुप्ता ने चीफ रिपोर्टर के पद पर भास्कर, जम्मू ज्वाइन किया है.बताया जाता है कि पंजाब केसरी को जब इन दोनों पत्रकारों के भास्कर ज्वाइन करने की भनक लगी तो इनकी सेलरी रोक दी. जम्मू में भास्कर की लांचिंग की तारीख करीब-करीब तय हो गई है. 24 जुलाई को अखबार प्रकाशित किया जाएगा, ऐसा माना जा रहा है. अमर उजाला, चंडीगढ़ से भी एक विकेट गिरा है. गोविंद चौहान ने भी दैनिक भास्कर, जम्मू ज्वाइन कर लिया है. वे सीनियर सब एडिटर के पद पर पहुंचे हैं. अमर उजाला, जम्मू के फोटोग्राफर अंकुर सेठी, जो काफी समय से रिटेनर के रूप में काम कर रहे थे, ने दैनिक भास्कर, जम्मू में फोटोग्राफर के रूप में ज्वाइन किया है। इंडियन एक्सप्रेस में काम कर चुके फोटोग्राफर अमरजीत सिंह भी भास्कर, जम्मू के हिस्से बन गए हैं. भास्कर, जम्मू की रिपोर्टिंग टीम करीब-करीब तैयार हो चुकी है. चीफ रिपोर्टर पवित्तर गुप्ता के अलावा उपमिता, अजय मीनिया, अविनाश, जूही समेत कुल सात रिपोर्टर रखे गए हैं. हेमंत कुमार न्यूज एडिटर के रूप में जम्मू एडिशन को देखेंगे. लांचिंग की तैयारियों के लिए चेतन शारदा जम्मू में डेरा डाले हैं. अभिजीत मिश्रा और कमलेश सिंह भी जम्मू पहुंचने वाले हैं और लांचिंग की तैयारियों को अंतिम रूप दिलाएंगे।

सोमवार, 12 जुलाई 2010

पहले तड़पाया, फिर सिर में गोली मारी

अपहृत पत्रकार की निर्ममतापूर्वक हत्या : बिहार सरकार के एक मंत्री पर उठी उंगली : हत्या के विरोध में बंद,  मौन जुलूस निकाला : कुशीनगर : अपहृत पत्रकार तेजबहादुर की लाश शनिवार को नौरंगिया (बिहार) थाना क्षेत्र के दिल्ली कैम्प के पास से बरामद हुई है. पत्रकार को क्रूरतापूर्वक यातना देने के बाद हत्यारों ने सिर में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था.
बिहार पुलिस ने रेलवे ट्रैक पर दो टुकड़ों में पड़ी लाश को पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया है. मृतक के परिजनों ने प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री की तरफ भी उंगलियां उठाई हैं. इस हत्या के विरोध में रामकोला एवं कप्तानगंज कस्बा बंद रहा तथा मौन जुलूस निकालकर लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया. गौरतलब है कि गुरुवार की शाम को लगभग सात बजे नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के गांव रायपुर फूलवरिया के पास से सशस्त्र अपराधियों ने अगवा कर लिया था. उत्तर प्रदेश की पुलिस हाथ-पांव मारती रही लेकिन अपहृत पत्रकार को ढूंढ नहीं पाई.
शनिवार को कुछ बारातियों ने दो टुकड़ों में कटी एक लाश को दिल्ली कैम्प के पास रेलवे ट्रैक पर पड़ा देखा. इसकी सूचना बारातियों ने पुलिस को दी. बाद में इस लाश की पहचान अपहृत पत्रकार तेजबहादुर के रूप में हुई. लाश मिलने की सूचना जंगल में आग की तरह फैल गई और वहां उत्तर प्रदेश एवं बिहार पुलिस के साथ-साथ भारी संख्या में आम नागरिक एवं पत्रकार पहुंच गए. पत्रकार के परिजनों के आने के बाद पूरा माहौल गमगीन हो गया. परिजनों की चीत्कार से उपस्थित लोगों में से अधिकांश की आंखें नम हो गईं. मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक को भी परिजनों एवं अखबारवालों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा. कुछ लोगों ने पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी भी की.

कब धरे जाएंगे पत्रकार अवनीश के हत्यारे?

यूपी के बस्ती जिले में 'आज' अखबार के पत्रकार अवनीश कुमार श्रीवास्तव के हत्यारे अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं. हत्या के दो हफ्ते बीत गए पर पुलिस कोई खुलासा नहीं कर सकी. पुलिस के इस रवैये से अवनीश के परिजन व पत्रकार खफा है. बस्ती जिले के पत्रकारों ने शनिवार को जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के बैनर तले हत्यारोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर मौन जुलूस निकाला.
बाद में पत्रकार पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) से मिले और उन्हें ज्ञापन दिया. डीआईजी अभिमन्यु त्रिपाठी ने पत्रकारों को भरोसा दिया कि इस मामले में कार्यवाही जारी है. घटना को अज्ञात हत्यारों ने अंजाम दिया है, इसलिये समय लग रहा है. जल्द ही घटना का पर्दाफाश होगा और हत्यारे गिरफ्त में होंगे. पत्रकारों ने पुलिस को चेतावनी दी है कि 15 दिन के भीतर पत्रकार अवनीश के हत्‍यारे गिरफ्तार नहीं किए गए तो आमरण अनशन शुरू कर दिया जाएगा.
गौरतलब है कि अवनीश श्रीवास्तव की हत्या 26 जून को शहर के रौता चौराहा के पास पुलिस बूथ के निकट गोली मारकर कर दी गयी थी. तभी से जिले भर के पत्रकार आंदोलित हैं, पर पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है.  न ही पुलिस ने रौता पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है, जिनकी लापरवाही के कारण पुलिस कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठनी शुरू हो गयी है. कांग्रेस सांसद तथा उत्‍तर प्रदेश कांगेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने अवनीश की हत्‍या की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. उन्‍होंने सीबीआई जांच के लिए प्रदेश सरकार से भारत सरकार को संस्तुति भेजने की मांग की.
जुलूस व ज्ञापन देने वालों में जयन्त कुमार मिश्र, दिनेश चन्द्र पाण्डेय, मजहर आजाद, संदीप गोयल, कौशल किशोर श्रीवास्तव, विपिन बिहारी त्रिपाठी, मजहर हुसैन, विनोद उपाध्याय, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, राजेश मिश्र, सज्जाद रिज्वी, मनीष श्रीवास्तव, तनवीर आलम, राकेश चन्द्र श्रीवास्तव‘बिन्नू’, नीरज त्रिपाठी, प्रमोद शाह, प्रमोद श्रीवास्तव, जीशान हैदर रिज्वी, आमोद उपाध्याय, जयप्रकाश उपाध्याय, रमेष पाण्डेय, अनिल श्रीवास्तव, धनन्जय, मोहम्मद इब्राहीम, मोहित श्रीवास्तव, स्कन्द शुक्ला, प्रकाश चन्द्र गुप्ता आदि थे.

शनिवार, 10 जुलाई 2010

पत्रकार बन वसूली करने वालों का मुंह हुआ काला

मेरठ : खुद को पत्रकार बता एक पार्षद के यहां वसूली करने पहुंचे दो युवकों की जमकर पिटाई की गई और थाने पर भी मुंह काला कर पीटा गया। पीडि़त एक महिला ने भी उनकी चप्पलों से धुनाई की। उनका एक साथी भागने में सफल रहा। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। इन युवकों के नाम आमिल पुत्र इरफान निवासी जैदी फार्म और वरुण कौशिक पुत्र मदन मोहन शर्मा हैं। दोनों ने खुद को कथित रूप से एक स्थानीय न्यूज चैनल से जुड़ा बताया। वार्ड 32 से पार्षद साबुन गोदाम निवासी मुकेश सिंघल को पिछले कई दिनों से पंकज अग्रवाल नाम का युवक फोन कर रहा था।
मुकेश प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। बकौल मुकेश पंकज खुद को एक स्थानीय न्यूज चैनल का सिटी चीफ बताते हुए उन्हें धमका रहा था कि अगर नगर निगम के ठेकों के काम चाहिए तो उन्हें हर माह पांच हजार रुपये देने होंगे। अगर पैसा नहीं दिया तो वे चैनल पर न्यूज चलाकर उनकी छवि खराब कर देंगे और उन्हें निगम से कोई काम नहीं मिलेगा। पार्षद ने उन्हें बहाने से बुधवार को लेन देन की बावत वार्ता के लिए हरि मंडप के सामने अपने साबुन गोदाम स्थित कार्यालय पर बुला लिया। पंकज अग्रवाल के अलावा आमिल और वरुण वहां पहुंच गए और बातचीत करने लगे।
अंतत: पांच हजार की बजाय दो हजार में मामला पट गया और तय हुआ कि हर माह यह पैसा दे दिया जाएगा। इस पूरी बातचीत को पार्षद ने गुपचुप तरीके से कैमरे में रिकार्ड करा लिया। इसी बीच पार्षद के साथी मनोज शर्मा, संजीव त्यागी, सुधीर शर्मा, अनुराग मिश्रा आ गए और आमिल और वरुण को दबोच लिया जबकि पंकज भागने में सफल हो गया। दोनों की कमरे में जमकर पिटाई की गई। वहां पहुंचे अन्य लोगों ने भी हाथ साफ किये। बाद में दोनों को टीपी नगर थाने लाया गया और वहां पर मुंह काला कर उनकी जमकर पिटाई की गई।
महिला ने चप्पलों से पीटा : यही तीनों युवक खुद को पत्रकार बताकर चंद्रलोक निवासी अलका गोयल पत्‍‌नी टीसी गोयल को मकान खाली करने के लिए धमका रहे थे। तीनों ने सीधे घर पहुंचकर तो धमकाया ही, पंकज ने महिला के पुत्र मोहित को फोन भी किया था कि अगर मकान खाली नहीं किया तो जान से मार दिया जायेगा। महिला ने इस बावत टीपीनगर थाने पर तहरीर दी थी। जिस वक्त दोनों की थाने पर मुंह काला कर पिटाई हो रही थी तभी महिला ने उन्हें पहचान लिया और उसने भी चप्पलों से उनकी जमकर खबर ली। पार्षद मुकेश सिंघल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। (साभार : दैनिक जागरण)

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

अमर उजाला के कई ब्यूरो चीफ बदले गए

जनपक्ष' मैग्जीन के बंद होने की सूचना : जौनपुर से बनारस, फिर लखनऊ, फिर बनारस और अब फिर जौनपुर. यह यात्रा की है अमर उजाला के पत्रकार विनोद पांडेय ने. जौनपुर में अभी तक ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत अखिलानंद को बलिया का प्रभारी बना दिया गया है. कुछ अन्य ब्यूरो चीफ भी बदले गए हैं. मिथिलेश दुबे को चंदौली का प्रभारी बनाया गया है. चंदौली के अनूप को बनारस भेज दिया गया है.
एक अन्य सूचना शिमला से है. हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाली मैग्जीन 'जनपक्ष' के बंद होने की खबर है. बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के कारण मैग्जीन का लगातार प्रकाशन संभव नहीं हो सका, इसलिए इसे बंद करना पड़ा.

भास्कर की लांचिंग पर छाए काले बादल

 संजय अग्रवाल कोर्ट से स्टे लाए : आरएनआई में आपत्ति खारिज हो गई थी : आरएनआई के खिलाफ कोर्ट गए थे संजय : दैनिक भास्कर, रांची व जमशेदपुर में लांचिंग पर फिर काले बादल मंडराने लगे हैं. अभी-अभी खबर मिली है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने आरएनआई के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसमें आरएनआई ने भास्कर की रांची व जमशेदपुर में लांचिंग को ओके कर दिया था और लांचिंग रोकने संबंधी आब्जेक्शन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पीआरबी एक्ट में उल्लखित आधारों पर लांचिंग रोकने संबंधी कोई नियम नहीं है.
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, उसकी कापी अभी तक मिल नहीं पाई है और यह भी पता नहीं चल पाया कि आदेश में मूलतः क्या कहा गया है. पर जो खबरें छन कर आ रही हैं उनके मुताबिक भास्कर के मालिकों में से एक संजय अग्रवाल के आब्जेक्शन को निरस्त करने संबंधी आरएनआई के आदेश को हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है. इस तरह से भास्कर की रांची व जमशेदपुर में लांचिंग का मामला टल सकता है, लटक सकता है, लंबा खिंच सकता है या रद भी हो सकता है.
ज्ञात हो कि भास्कर के मालिकों में से एक, संजय अग्रवाल, जिन्हें यूपी व उत्तराखंड इलाके में भास्कर के संचालन का सर्वाधिकार प्राप्त है, ने रमेश चंद्र अग्रवाल और उनके पुत्रों की कंपनी डीबी कार्प के बिहार व झारखंड में दैनिक भास्कर लांच करने संबंधी प्रयास को चुनौती दी थी. पटना व रांची समेत कई जिलों में, जहां डीबी कार्प ने भास्कर निकालने के लिए डिक्लयरेशन फाइल किया था, वहां वहां संजय अग्रवाल ने यह कहते हुए आब्जेक्शन फाइल किया था कि भास्कर ब्रांड के कई मालिक हैं और बिना सभी की सहमति के डीबी कार्प को किसी नई जगह से अखबार लांच करने का अधिकार नहीं है.
संजय के आब्जेक्शन पर संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों ने पूरे मामले को आरएनआई के हवाले कर दिया था. आरएनआई ने मामले को लटकाये रखा और एक तरह से डीबी कार्प की तरफदारी करते हुए उन्हें सुझाव दिया था कि वे लोग बिहार - झारखंड के किसी भी जिले से गुपचुप ढंग से डिक्लयरेशन हासिल कर लें व उसी आधार पर हर जगह से प्रकाशन शुरू कर दें. जब इसकी भनक संजय अग्रवाल को लगी तो उन्होंने आरएनआई में जाकर विरोध दर्ज कराया और इस आशंका से सभी को अवगत कराया कि डीबी कार्प के लोग बिहार झारखंड के किसी भी जिले से गुपचुप ढंग से डिक्लयरेशन हासिल कर अखबार का प्रकाशन शुरू कर सकते हैं, जो गलत होगा.
बताया जाता है कि आरएनआई ने जो फैसला सुनाया वह डीबी कार्प के अनुकूल था. इस फैसले में संजय अग्रवाल की आपत्तियों को पीआरबी एक्ट का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया था. तब संजय अग्रवाल आरएनआई के खिलाफ हाईकोर्ट गए और अब सूचना है कि हाईकोर्ट ने आरएनआई के आदेश पर स्टे दे दिया है. इस पूरे मामले पर संजय अग्रवाल का कहना है कि उनके हाथ में अभी तक कोई आदेश आया नहीं है इसलिए वह आन रिकार्ड कुछ कहने की स्थिति में नहीं है. कोर्ट के आदेश की कापी देखने के बाद ही वे कुछ कहने की स्थिति में होंगे. भास्कर के आंतरिक झगड़ों से संबंधित अन्य खबरें पढ़ने के लिए नीचे, कमेंट बाक्स के ठीक नीचे, दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें.
-सौ. भडास फोर मीडिया

नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ ने दिया विभागीय आयुक्त को ज्ञापन

 न्याय नहीं मिला तो आंदोलन जारी रहेगा :  दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन का मांग : नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के पदाधिकारी, सदस्यों व गैर पत्रकारों ने 5 जुलाई को भारतबंद का कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर लाठीचार्ज के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की मांग को लेकर विभागीय आयुक्त कार्यालय के पास विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन का निर्णय मंगलवार को ही एक बैठक में लिया गया था। सुबह 12:30 बजे प्रदर्शन के दौरान भारी बारिश हो रही थी।
लेकिन मूसलाधार बारिश में भी आक्रोशित मीडियाकर्मियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। मीडियाकर्मियों ने काले फीते लगाकर भीगते हुए विरोध प्रदर्शन किया। मीडियाकर्मियों के गुस्से को पहले ही भांपकर पुलिस ने यहां तगड़ा बंदोबस्त किया था। एक डीसीपी, चार एसीपी समेत अनेक पुलिसकर्मी यहां चौकस थे। पुलिसकर्मियों की भीड़ मीडियाकर्मियों से ज्यादा नजर आई। प्रदर्शनकारी मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष शिरीष बोरकर ने कहा कि पुलिस ने मीडियाकर्मियों पर जो हमला किया है, वह नहीं सहा जाएगा। जब तक दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक हमारा आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। '
'दैनिक 1857' प्रधान संपादक एस.एन. विनोद ने कहा कि पुलिस ने मीडियाकर्मियों पर तब लाठीचार्ज किया जब वे अपनी सच्ची ड्यूटी निभा रहे थे। उनका यह बर्ताव गलत है। जब तक उन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। मीडियाकर्मियों पर हुआ हमला किसी भी सूरत में नहीं सहा जा सकता है। मीडियाकर्मियों के विरोध प्रदर्शन को विदर्भ जनआंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने भी समर्थन दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारी मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का यह व्यवहार निंदनीय है। दूसरे के सुख-दु:ख की खबर से कवरेज कर सरकार को जगाने वाले मीडियाकर्मियों पर पुलिस का यह व्यवहार अत्याचार है। उन्होंने मीडिया द्वारा किए जा रहे विरोध को जायज ठहराते हुए कहा कि विदर्भ के आदिवासी और किसानों का समर्थन मीडियाकर्मियों के साथ हैं। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए।
रिपब्लिकन पार्टी के पार्षद प्रकाश गजभिये ने कहा कि भारत बंद को पूरी जनता का समर्थन था। यह बंद किसी एक पार्टी ने नहीं कराया था। प्रदर्शन के बाद मीडियाकर्मियों का जत्था विभागीय आयुक्त गोपाला रेड्डी के कार्यालय के अंदर पहुंचा। नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष शिरीष बोरकर ने भारतबंद के दौरान मीडियाकर्मियों पर हुए लाठी चार्ज के बारे में बताया। संघ के सचिव संजय लोखंडे ने लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबन का ज्ञापन दिया। विभागीय आयुक्त ने इस संबंध में जल्द ही कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. विनोद, महाराष्ट्र श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष यदु जोशी, तिलक पत्रकार भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रदीप मैत्र, वरिष्ठ पत्रकार जोसेफ राव, स्वदेश के संपादक विश्वास इंदुरकर, लोकशाही वार्ता के विनोद देशमुख, इंडिया न्यूज के विदर्भ ब्यूरो के प्रमुख राजेश तिवारी, दैनिक 1857 के चीफ रिपोर्टर संजय कुमार, नेशनल संदेश के सीनियर रिपोर्टर अभय यादव, राजेश बागड़े, सीएनईबी के कैमरामैन रविकांत कांबले, पुण्यनगरी के फोटो जर्नलिस्ट प्रशिक डोंगरे, संजय लचुरिया, देवेश व्यास, दैनिक भास्कर के छोटू वैतागे, विनोद झाडे, लोकशाही वार्ता के जीवक गजभिये, स्वदेश के सौरभ,लोकसत्ता के ज्योति तिरपुडे, स्वदेश के धीरज पाटिल, लोकमत के अविनाश महाजन, नवभारत के अभिषेक तिवारी, लोकमत समाचार के जगदीश जोशी, तरुण भारत के दिलीप दुपारे, टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटो जर्नलिस्ट रंजीत देशमुख और सुदर्शन समेत नागपुर के मीडिया संस्थानों के अनेक पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट उपस्थित थे।
सौजन्य-भडा़स फोर मीडिया. काम